बैरावाली माता की यात्रा पर विवाद गहराया

चंबा। लक्ष्मी-नारायण मंदिर कमेटी ने बैरावाली माता लेकर आए वाद्य यंत्र बजाने वाले दल को 22 दिन के तय कार्यक्रम के तहत वापस लौटने का फरमान जारी कर दिया है। इस संबंध में जारी लिखित निर्देश के चलते इस दल में हड़कंप मच गया है। मंदिर कमेटी के मैनेजर देवी प्रसाद उपाध्याय ने बताया कि परंपरा के अनुसार बैरावाली माता को पुजारी के साथ वाद्य यंत्र बजाने वाला दल 110 किमी. दूर तीसा उपमंडल में स्थित देवीकोठी से पैदल लाया जाता है। चंबा में पहुंचने के बाद माता अपनी बहन चामुंडा से मिलती है और यहां ठहरती है। इस दौरान चामुंडा मंदिर में मेले लगते हैं और भक्त दोनों देवियों के दर्शन करते हैं। फिर बड़ी जातर के बाद माता एक दिन चंबा में ठहरने के बाद सात दिन विभिन्न पड़ावों पर रुकने के बाद अपने स्थान पर पहुंचती है। उन्होंने बताया कि माता के पुजारी से उन्हें शिकायत मिली थी कि बजाने वाला दल उनकी मर्जी के बिना ही माता को घर-घर ले जाकर पैसे कमाने के काम में लगा हुआ है। इससे सदियोें से चली आ रही इस परंपरा की पवित्रता को ठेस पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि इसी के चलते उन्होंने नोटिस जारी करके इस यात्रा को परंपरा के तहत चलाकर 22 दिनों की पुरानी परंपरा के अनुसार ही चलाया जाए। उधर, इस फरमान से तिलमिलाए बैरावाली माता का बजाने वाला दल कुछ स्थानीय लोगों के साथ उपायुक्त संदीप कदम के पास पहुंचा और इस नोटिस को धार्मिक आस्था में हस्तक्षेप करार दिया। हालांकि उपायुक्त ने लक्ष्मी नारायण मंदिर कमेटी के मंदिर कमेटी के मैनेजर के साथ बैठक करके फिलहाल मामला शांत करवा दिया है। बैरावाली माता के साथ पहुंचे हेम राज, राकेश, सीता राम, निर्मल, माधो राम, वीरेंद्र कुमार, सिंधू राम, खेम राज, बंसी लाल, धनी राम, भारत, जन्म सिंह, नरेश व जगत राम ने बताया कि लोगों की आस्था के अनुसार जो माता को अपने घर अपनी इच्छानुसार बुलाते हैं, वे माता को लेकर वहीं जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे अपनी मर्जी से कहीं नहीं जाते। उन्हाेेंने कहा कि अगर लोगों के बुलाने पर वे नहीं जाते तो उन्हेें लोगों का विरोध भी सहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब वह चामुंडा मंदिर पहुंचते हैं तो वहां पर उनके लिए ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं होती और न ही खाने-पीने व शौचालय तक का इंतजाम है। लिहाजा श्रद्धालुओं के घरों में ही खोने-पीने व ठहरने की व्यवस्था होती है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी नारायण मंदिर प्रबंधन कमेटी का फरमान उन्हें मंजूर नहीं है। उन्होंने प्रशासन से समस्या का समाधान करने की मांग की है।
इंसेट…..
हजारों रुपये की मांग करने की शिकायत
लक्ष्मी नारायण मंदिर कमेटी के मैनेजर ने बताया कि माता को घरों में ले जाने के लिए 75 हजार रुपये तक की मांग किए जाने की शिकायत मिली है। उन्होंने कहा कि अब तो माता को उसके पारंपरिक मार्ग से भटका कर बाथरी व पठानकोट तक ले जाने की बातें सुनने को मिल रही हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल को बड़ी जातर के बाद माता चंबा ठहरेगी और इसके बाद एक मई को सरोल और फिर पुखरी व कोटी होती हुई सात दिनों बाद देवीकोठी पहुंचनी चाहिए।

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